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कुंवर लाला हरदौल indohindi.in

                                   लाला हरदौल

लाला हरदौल  के  बड़े  भाई  राजा  जुझार  सिंह  ओरछा  के  राजा  थे l लाला हरदौल 
दिल्ली  के  मुग़ल  शाशक  से  उनकी  मित्रता  थी  लेकिन  राजकुमार  कुंवर  हरदौल हमेशा  मुगलों  से  युद्ध  को  तत्पर  रहते  थे  वो  क्षत्रिय  ब्राह्मण  एक  कर  ओरछा  को  स्वतंत्र  हिन्दू  राज्य के  रूप  में  देखना  चाहते  थे उन्होंने  कदौरा. कालपी  भांडेर  और  एरिच  के  मुग़ल  सरदारों  को  भागने  को  मजबूर  कर  दिया  था  तब  मुग़ल  सरदार  राजा लाला हरदौल    जुझार  सिंह  से  चुगली  कर  यह  संदेह  उतपन्न  कर  गए  की  हरदौल  के  आपकी  पत्नी  से  गलत  रिश्ते  है  और  हरदौल  आपके  मुग़ल  मित्रो  को  और  आपको  मार  स्वयं  राजा  बनना  चाहते “”! ओरछा
तब  जुझार  सिंह  ने  अपनी  रानी  से  हरदौल  को  भोजन  मे  जहर  देने  को  बोला  रानी  हरदौल  को  पुत्र  की  तरह  मानती  थी  उन्होंने  कुंवर  हरदौल  को  पूरी  बात  बताई  तब  हरदौल  सहर्ष  जहर  मिला  भोजन  कर  मृत्यु  को  स्वीकार  कर  गए  उनकी  तेहरवीं  मेँ  ब्राह्मणों  ने  भोजन  करने  से  मना  कर  दिया  था  तब  राजा  जुझार  सिंह  ने  तेरह  हजार  जागीरें  ब्राह्मणों  को  दान  की  गंगा  स्नान किये ओरछा
उसी  बीच  दतिया  की  रानी  कुंजावती  अपने  भाई ओरछा   जुझार  सिंह  और  कुंवर  हरदौल  को  अपनी  पुत्री  के  बिबाह  को  निमंत्रण  और  भात मांगने  आई तब  कुंवर  हरदौल  की  मृत्यु  का  समाचार  सुन  दुःखी  हुई  उनकी  समाधि  स्थल  पर  बिलाप  करने  लगी l लाला हरदौल 
बताते  हे  तब  कुंवर  हरदौल  बहिन  कुंजावती  को  रोता  देख  प्रकट  हुये और  बहिन  को  वादा  किया  भांजी  की  शादी  मे  भात  लेकर  आऊंगा l
तब सेकड़ो  बैलगाड़ी  उपहार  भर   भात  दतिया  पहुंचा  और  दूल्हे के  जिद  क्ररने  पर  कुँअर  हरदौल  पुनः  प्रकट  हुये  और  दूल्हे  को  कलेवा  अपने  हाथ  से कराया इस  ऐतिहासिक  घटना  को  400साल  होने  को  है  हमारे  बुंदेलखंड  के  प्रतेक  गाँव मे  कुंवर  हरदौल  को  देव  तुल्य  मान  उनके  चबुतरे  बना  पूजा  जाता  और  प्रतेक  विवाह  मे  सबसे  पहिले ओरछा   उनको  निमंत्रण  दिया  जाता .. मान्यता  है  इससे  हरदौल  शादी  मे  उपस्थित  होते  बिबाह  मे  कोई  कमी  नही  रहतीं  जो कमी  हो  आज  भी  कुंवर  हरदौल  पूरी  करते l लाला हरदौल  ओरछा



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