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ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें दिलों में उल्फत नई-नई है
अभी तक़ल्लुफ़ है गुफ़्तगू में अभी मोहब्बत नई-नई है
ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें दिलों में उल्फत नई-नई है

अभी न आएगी नींद तुमको अभी न हमको सुकूं मिलेगा
अभी तो धड़केगा दिल ज्यादा अभी ये चाहत नई-नई है
ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें दिलों में उल्फत नई-नई है

बहार का आज पहला दिन है चलो चमन में टहल के आएं
फ़ज़ां में खुशबू नयी नयी है गुलों पे रंगत रंगत नई-नई है
ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें दिलों में उल्फत नई-नई है

जो खानदानी रईस हैं वो मिज़ा रखते हैं नरम अपना
तुम्हारा लहज़ा बता रहा है तुम्हारी दौलत नई-नई है
ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें दिलों में उल्फत नई-नई है

जरा सा कुदरत ने क्या नवाजा कि आके बैठे हैं पहली सफ़ में
अभी से उड़ने लगे हवा में अभी तो शोहरत नई-नई है
ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें दिलों में उल्फत नई-नई है

बमों की बरसात हो रही है पुराने जांबाज़ सो रहे हैं
गुलाम दुनिया को कर रहा वो जिसकी ताकत नई-नई है
ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें दिलों में उल्फत नई-नई है

  साभार-                                                                           ~ शबीना अदीब 
https://youtu.be/oWPSDP0bVVI

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