अमा मियां ये लखनऊ है।

अमा मियां ये लखनऊ है।

यहां झगड़े भी “आप” कहकर होते हैं।

यहां की शाम मशहूर है। कहते हैं कि सुबह देखनी हो तो बनारस जाएं और शाम देखनी हो तो लखनऊ। यह बिलकुल सही है। जी है मैने यहां की शाम।

लखनऊ की तारीफ आपको किसी भी लखनवी से मिल जाएगी। उसके सामने आप शहर को छोटा मत कहिएगा, वह नाराज हो जायेगा।

खाना आप लखनऊ जैसा कहीं नहीं पाएंगे।

यहां की चाट खाकर आप फूलें नहीं समायेंगे।

हजरतगंज की ठाट भी लाजवाब है।

यहां का हर एक शख्स नवाब है।

ज्येष्ठ के पूरे महीने में लखनऊ में ही बजरंग बली का मेला मिलेगा, पूरे शहर में हर 100 मीटर की दूरी पर 2 से 3 भंडारों के स्टाल लगे होंगे। हर मंगलवार रौनक दिखेगी।

छतों का प्यार देखना है तो लखनऊ आएं।

पतंगबाजी में यह सबसे आगे है।

इक्का और तांगा की सवारी आपको आज भी मिल जाएगी।

लखनऊ में भाईचारा दिखाई देगा। इतिहास गवाह है आज तक शहर में शांति बरकरार रही है, कभी यहां हिन्दू मुस्लिम विवाद नहीं हुआ।

यहां शिया और सुन्नी विवाद होता है।

सबसे अधिक शिया मुसलमान लखनऊ में हैं।

ईरान के बाद मुहरम देखना हो तो लखनऊ आना चाहिए।

यहां रिक्शे वाले को भैया और बुजुर्ग को चचा कहते हैं।

टैक्सी वाले भी आपको “आप” कहकर बुलाते हैं।

और क्या-क्या बताऊँ लखनऊ के बारे में।

ये मेरी जान है।

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